Pudina KE BEST 9+ UPYOG

Pudina KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो Pudina ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास Pudina होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है Pudina के उपयोग।

Pudina KE BEST 9+ UPYOG
Pudina KE BEST 9+ UPYOG

अन्य भाषाओं में Pudina नाम

संस्कृत – वान्तिहारी , रुचिश्य , शाकशोभन
बंगाली – Pudina
हिन्दी – पोदीना
अंग्रेजी – टालरेड मिंट
गुजराती – फोदिना
लैटिन – मेन्था सिलवेसट्रिस
मराठी – पुदिना

परिचय

पोदीना भारत में सभी जगह पाया जाता है । आमतौर पर इसका प्रयोग चटनी बनाने में किया जाता है , जबकि विभिन्न औषधियों में इसके सत्व या रस का प्रयोग होता है । Pudina का पौधा हरा और सुगन्धित होता है ।

इसकी पत्तियाँ तुलसी के पत्तों की तरह हरी , कोमल और गहरे हरे रंग की होती हैं । यह पौधा गर्मियों में पाया जाता है । इसकी पत्तियों को सुखाकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रखा जाता है ताकि ऋतु न होने पर इसका लाभ उठाया जा सके । सूखने के बाद भी इसकी सुगन्ध वैसी ही रहती है ।

प्रयोग

Pudina का सेवन अरुचि , मुख की बदबू , अजीर्ण , गैस , ज्वर , हिचकी , दस्त , उल्टी , खाँसी और जुकाम आदि में किया जाता है । यह हृदय को ठण्डक देता है । रोग के कीटाणुओं का नाश करता है । त्वचा की गर्मी दूर करता है । यह सौन्दर्यवर्धक है तथा प्रसूतिकाल में होने वाले रोगों को दूर करता है ।

विभिन्न रोग व उपचार

पाचन सम्बन्धी रोग

Pudina के एक चम्मच रस में नीबू का रस और शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार सेवन करने से अपच दूर होती है और भूख लगती है । इससे पित्त रोग , वायु संचय के कारण पेट दर्द , फीता कृमि , सुबह की सुस्ती औरदस्त आदि में आराम मिलता है । Pudina को अकेले या चाय की पत्ती के साथ डालकर एक – एक कप रोजाना सुबह – शाम पीने से पाचन क्रिया सुधरती है और चेहरे की ताज़गी व आभा बनी रहती है ।

Pudina का चूर्ण भोजन पर बुरककर सेवन करने से भी लाभ होता है । गर्भकाल में Pudina का रस गरम – गरम पीने से पेट दर्द दूर होता है । बड़ी उम्र के बच्चों को यदि पेट में तेज़ दर्द हो या अपच हो तो Pudina के बीजों का चौथाई से आधा चम्मच चबाकर थूक के साथ निगलने से या पानी के साथ लेने से लाभ होगा ।

हिचकी

कच्चे नारियल के साथ Pudina के पत्तों को चबाकर रस चूसा जाए तो हिचकी बन्द हो जाती है ।

आवाज़ बैठना

ऊँची आवाज़ में बोलने , चिल्लाने , गाने या भाषण देने से आवाज़ प्रायः बैठ जाती है । इन सभी रोगों में Pudina के ताज़ा पत्तों का काढ़ा तैयार करके , उसमें थोड़ा – सा नमक डालकर गरारे करने से पर्याप्त लाभ होता है ।

मूर्छा या बेहोशी

बेहोश व्यक्ति को Pudina के पत्ते सुँघाने से बेहोशी दूर होती है ।

मुरव के रोग

Pudina के ताज़ा पत्तों को रोज़ाना चबाने से दाँत साफ रहते हैं और दाँत दर्द भी दूर होता है । Pudina में पाया जाने वाला क्लोरोफिल मुँह में विषाणु खत्म करके मुँह की दुर्गन्ध दूर करता है । इससे मसूड़े सुदृढ़ होते हैं । दाँतों का समय से पहले गिरना या टूटना , दंतक्षय , पायोरिया आदि रोगों में लाभ होता है । इससे मुँह में ताज़गी बनी रहती है और जिह्वा की स्वाद की क्षमता भी बनी रहती है ।

पेट के कीड़े

अधिकतर बच्चों के पेट में कीड़े पाए जाते हैं , परन्तु आजकल किसी भी आयु के व्यक्ति इनसे प्रभावित हो सकते हैं । यदि Pudina के ताजे पत्तों के रस का चौथाई या आधा चम्मच सुबह – शाम लगातार लिया जाए तो पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं ।

चर्म रोग

चेहरे पर ताज़ा Pudina के पत्तों का रस रात के समय लगाने से चेहरे की शुष्कता मिटती है और पुंसियां दूर होती हैं । यदि यही रस कीड़े के काटने , एक्जिमा और अन्य प्रकार के चर्म रोगों के स्थान पर लगाया जाए तो सभी प्रकार के रोगों में लाभ होता है ।

श्वास सम्बन्धी रोग

एक चम्मच ताज़ा Pudina के रस में दो चम्मच शुद्ध माल्टा का सिरका , एक चम्मच शहद तथा चार औंस गाजर के रस को भली प्रकार मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से टी.बी. , दमा और ब्रोंकाइटिस आदि रोगों में लाभ होता है । इससे बलगम ढीला होकर पिंघल जाता है । फेफड़ों को ताकत मिलती है । शरीर की रोगनिरोधक क्षमता बढ़ती है ।

प्राकृतिक गर्भ निरोधक

एक अनुसंधान के अनुसार Pudina के हरे पत्तों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और शीशी में रख लें । इस चूर्ण की 10 ग्राम ( दो चम्मच ) मात्रा यदि गर्भ न चाहने वाली स्त्री संभोग से कुछ देर पहले पानी के साथ सेवन कर ले तो गर्भ धारण की सम्भावना समाप्त हो जाती है । जब तक वह इस चूर्ण का सेवन करती रहेगी , उसे गर्भ नहीं ठहरेगा । यदि गर्भ की इच्छा हो तो चूर्ण लेना बन्द कर दें ।

जलन से छुटकारा पाने के लिए हलवा फायदा करता है

शरीर की जलन को दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियों का काढ़ा बनाएं। 15 मिलीलीटर पीने से जलन कम हो जाती है। पुदीना (pudding ke fayde) के औषधीय गुण शरीर की जलन को कम करने के लिए लाभकारी तरीके से काम करते हैं।

सूजन का इलाज करने के लिए पुदीना

अगर शरीर के किसी हिस्से में सूजन के कारण दर्द हो रहा है, तो पेपरमिंट का उपयोग इसे राहत दे सकता है। सूजन होने पर सूखे पुदीने की पत्तियों को सिरके में पीस लें। जब लगाया जाता है, तो कपशा दोष के कारण होने वाली सूजन ठीक हो जाती है।

पेपरमिंट का उपयोग बिच्छू के डंक मारने के लिए (बिच्छू के काटने के लिए हलवा)

पुदीना बिच्छू के डंक से होने वाले दर्द और जलन से राहत दिलाने में मदद करता है। ऐसा करने के लिए, सूखे पुदीने के पत्तों को पीस लें। उस जगह पर लागू करें जहां बिच्छू ने काट लिया है, दर्द और जलन को कम करता है।

श्वेत कुष्ठ

Pyaj के बीजों का लेप श्वेत कुष्ठ में लाभदायक है ।

नज़ला

Pyaj के 10-20 मिली लीटर रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो – तीन बार चाटने से नज़ला मिटता है ।

पेशाब में जलन , पेशाब रुकना

यदि पेशाब करते समय जलन हो रही हो तो एक चम्मच Pyaj की लुगदी को 500 मिली लीटर पानी में उबालें । जब मात्रा आधी शेष रह जाए तो उसे ठण्डा करके छान लें और रोगी को पिलाएँ । पेशाब की जलन एवं रुकावट में लाभ होगा।

एक Pyaj को कद्दूकस करके इसमें 10 गुना चीनी मिलाकर रोगी को दें । इससे पेशाब की रुकावट दूर होगी और पेशाब का निर्बाध प्रवाह पुनः चालू हो जाएगा ।

Pyaj KE BEST 9+ UPYOG

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