Palak KE BEST 9+ UPYOG

Palak KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो Palak ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास Palak होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है Palak के उपयोग।

Palak KE BEST 9+ UPYOG
Palak KE BEST 9+ UPYOG

अन्य भाषाओं में Palak नाम

संस्कृत – पलक्या , वास्तुकाकारा , छुरिका
हिन्दी – Palak का शाक
लैटिन – स्पाईनेशिया ओलिरेसिया
बंगाली- पालंडशाक
फारसी – अस्पनाख
अंग्रेज़ी – स्पाईनेज

परिचय

Palak की हरी व कोमल पत्तियाँ होती हैं । यह भारतवर्ष में सभी जगह पाया जाता है । इसमें विटामिन ए , बी , सी तथा लोहा और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है । कच्चा Palak खाने में कड़वा और खारा होता है ।

प्रयोग

Palak औषधीय गुणों से भरपूर है । इसके सेवन से पथरी , गले का दर्द , पाचन – संस्थान के रोग , पायरिया आदि ठीक हो जाते हैं ।

विभिन्न रोग व उपचार

पथरी

कई लोग यह मानते हैं कि Palak के खाने से पथरी होती है , लेकिन यह भ्रम है । कच्चे Palak के रस के सेवन से पथरी कदापि नहीं होती ।

गले का दर्द

Palak के पत्ते उबालकर पानी छान लें और पत्ते भी निचोड़ लें । इस गर्म – गर्म पानी से गरारे करने से गले का दर्द ठीक हो जाता है ।

रक्तक्षीणता

आधे गिलास Palak के रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर 50 दिन पीएँ । इसके सेवन करने से रक्तविकार और शरीर की खुश्की दूर हो जाती है और शरीर में रक्त की वृद्धि होती है । रक्त की कमी दूर करने के लिए Palak सर्वोत्तम है ।

रक्तक्षय संबंधी विकृतियों में यदि प्रतिदिन Palak का रस नित्य 3 बार 125 मिली लीटर की मात्रा में लिया जाए तो समस्त विकार दूर होकर चेहरे पर लालिमा , शरीर में स्फूर्ति , उत्साह एवं शक्ति का संचार होता है तथा रक्तभ्रमण भी तेज़ी से होता है ।

कच्चे पत्ते या छिलके सहित , मूंग की दाल में Palak की पत्तियाँ डालकर सब्जी खानी चाहिए । यह रक्त साफ करती है और बल प्रदान करती है ।

पाचन – संस्थान के रोग

कच्चे Palak का रस आधा गिलास प्रात : पीते रहने से कुछ ही दिनों में कब्ज ठीक हो जाती है । कुछ दिन लगातार अधिक मात्रा में खाने से पेट के रोगों में लाभ होता है । आँतों के घाव आदि में Palak का रस लाभदायक है ।

रात को बार – बार पेशाब जाना

शाम को Palak की सब्जी खाने से रात को बार – बार पेशाब जाना ठीक हो जाता है ।

पायरिया

Palak का रस दाँतों और मसूड़ों को मजबूत बनाता है । पायरिया के रोगी को कच्चा Palak दाँतों से चबाकर खाना चाहिए । भूखे पेट Palak का रस पीने से पायरिया ठीक हो जाता है । इसमें गाजर का रस मिलाकर पीने से मसूड़ों से रक्तस्त्राव होना बंद हो जाता है ।

आँरवों के लिए

Palak का रस पीने से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है ।

शरीर क्रिया विज्ञान

सम्पूर्ण पाचन तंत्र की प्रणाली ( पेट , छोटी आँत , बड़ी आँत ) के लिए Palak का रस सफाई कारक एवं पोषणकर्त्ता

कच्चे Palak के रस में प्रकृति ने हर प्रकार के शुद्धिकारक तत्व प्रदान किए हैं । Palak संक्रामक रोग तथा विषाक्त कीटाणुओं से उत्पन्न रोगों से रक्षा करता है ।

पेशाब के रोग

आधा किलोबथुवा , तीन गिलास पानी में उबालें और फिर उसे छान लें।बथुवेको निचोड़कर यह भी छानेहुए पानी में मिला लें।स्वाद के लिए नीबू , जीरा , ज़रा सी काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर पीएँ । पेशाबके रोग में आराम आता है।मूत्राशय , गुर्दे और पेशाब के रोगों में बथुवे का साग भी लाभ करता है ।

जिन्हें पेशाब रुक – रुककर आता हो , कतरा – कतरा सा आता हो उन्हें इसका रस पीने से पेशाब खुलकर आएगा । बथुवे से तैयार किया गया पानी दिन में 3 बार पिलाने से पेशाब में जलन , पेशाब कर चुकने के बाद होने वाला दर्द , टीस उठना ठीक हो जाता है ।

दस्त साफ आता है , पेट की गैस , अपच दूर हो जाता है और पेट हल्का मालूम पड़ता है । बथुवे के उबले हुए पत्ते दही में मिलाकर खाएँ , बहुत स्वादिष्ट लगते हैं ।

जलना

आग से जले अंग पर कच्चे बथुवे का रस बार – बार लगाएँ । आराम आता है जलन कम हो जाती है ।

मासिक धर्म

मासिक धर्म रुका हो तो 2 चम्मच बथुवे के बीज 1 गिलास पानी में उबालें । आधा रहने पर छानकर पी जाएँ । मासिक धर्म खुलकर साफ आएगा ।

आँरवों के रोग

आँखों में सूजन , लाली हो तो प्रतिदिन बथुवे की सब्जी खाएँ ।

बथुवा आमाशय को ताकत देता है । कब्ज दूर करता कब्ज़ है । बथुवे की सब्जी दस्तावर होती है । जिन्हें कब्ज रहती हो उन्हें रोज़ बथुवे की सब्जी खानी चाहिए । कुछ सप्ताह रोज़ बथुवे की सब्जी खाने से सदा रहने वाला कब्ज दूर हो जाता है । शरीर में ताकत आती है और स्फूर्ति बनी रहती है ।

कृमि

कच्चे बथुवे का 1 कप रस स्वादानुसार नमक मिलाकर एक बार नित्य पीते रहने से कृमि मर जाते हैं । बथुवे के बीज 1 चम्मच पिसे हुए , शहद में मिलाकर चाटने से भी कृमि मर जाते हैं तथा रक्तपित्त ठीक हो जाता है ।

चर्म रोग

सफेद दाग , दाद , खुजली , फोड़े , कुष्ठ आदि चर्म रोगों में रोज़ बथुवा उबालकर , निचोड़कर इसका रस पीएँ तथा सब्जी खाएँ ।

बथुवे के कच्चे पत्ते पीसकर , निचोड़कर रस निकाल लें । 2 कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर धीमी आग पर गर्म करें । जब रस जलकर तेल ही रह जाए तो छानकर शीशी में भर लें । नित्य चर्म रोगों पर लगाएँ । कुछ समय तक लगाते रहने से लाभ होगा ।

फँसी , सूजन पर बथुवे को कूटकर सोंठ और नमक मिलाकर , गीले कपड़े में बाँधकर तथा कपड़े पर गीली मिट्टी लगाकर आग या भोभल में सेकें । सिकने पर गर्म – गर्म बाँधे । फोड़ा बैठ जाएगा या पककर शीघ्र फूट जाएगा ।

पालक में मैग्नीशियम, विटामिन और फाइबर होता है, जो कैंसर रोग के कीटाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है और इससे लड़ने में भी सहायक है।

दिल का दौरा, या दिल से संबंधित सभी बीमारियों को पालक खाने से दूर किया जा सकता है।
जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें पालक खाना चाहिए क्योंकि इनमें कैलोरी कम होने के साथ-साथ अधिक प्रोटीन भी होता है, जो फायदेमंद है।
अंतर्ग्रहण होने पर रोग का प्रतिरोध भी बढ़ जाता है।
पालक खाने से शरीर में खून बढ़ता है, जिससे एनीमिया नहीं होता है।
पालक खाने से गठिया से राहत मिलती है।

इसमें विटामिन सी भी होता है, जो रक्तस्राव की समस्याओं को खत्म करता है।
पालक खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और रतौंधी की समस्या दूर होती है।
पालक में फाइबर भी होता है, जो पेट के अल्सर, अपच, कब्ज और नाराज़गी को खत्म करता है।

पालक में विटामिन K भी होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर में कैल्शियम की कमी को दूर करता है।

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