Lahsun KE BEST 9+ UPYOG

Lahsun KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो Lahsun ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास Lahsun होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है Lahsun के उपयोग।

Lahsun KE BEST 9+ UPYOG
Lahsun KE BEST 9+ UPYOG

अन्य भाषाओं में Lahsun के नाम

संस्कृत – रसोन , उग्रगंध , महौषध
अंग्रेजी – गार्लिकरूट
हिन्दी- लहसन
लैटिन – एलियम सेटाइवम्

परिचय

Lahsun सुप्रसिद्ध वनस्पति है , जिसका प्रयोग न जाने कितनी शताब्दियों से मसाले तथा औषधि के रूप में किया जा रहा है । इसकी खेती पूरे साल होती है । इसकी जड़ें असामान्य चौड़े तने वाली और चपटी होती हैं ।

इनमें सफेद रंग की पोथियाँ लगती हैं । प्रत्येक पोथी में 6 से 12 तक कलियाँ होती हैं । इन कलियों में से तीव्र गन्ध आती है । वैसे तो सभी पोथियों वाला लहसन भोजन एवं औषधि में प्रयोग किया जाता है , परन्तु एक पोथी वाला Lahsun सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । प्रत्येक कली पर कड़ा छिलका होता है जिसके भीतर सफेद , चमकदार , पारदर्शक तुरियाँ पाई जाती हैं ।

प्रयोग

इसका प्रयोग दमा , बहरापन , कुष्ठरोग , फेफड़ों में कफ के जमाव , नाड़ी काठिन्य , विविध प्रकार के ज्वर , पेट और आँतों के कीड़े मारने , पित्त की थैली के रोग , हृदय रोग , 1 ब्लड प्रेशर , भूख बढ़ाने , बालों के रोग , शक्ति संवर्द्धन , फुलबैरी , नज़ला – जुकाम , बवासीर और कफ आदि में किया जाता है ।

विभिन्न रोग व उपचार

काली खाँसी

लहसन की कली आग पर भूनकर शहद में पीसें और रोगी को चटा दें । बच्चों को आधी मात्रा में चटाएँ । शिशुओं को Lahsun की राख ज़रा – सी देनी चाहिए और माता के ही दूध के साथ यह ठीक रहती है । इससे काली खाँसी में आराम आता है ।

अपामार्ग के रस में Lahsun का रस मिलाकर पिलाएँ । रोगी के सीने पर नर्म हाथों से जैतून के तेल की मालिश करें । यह प्रक्रिया दो – दो घण्टे बाद दोहराते रहें । बच्चों को छिली हुई लहसन की कली तोड़कर सुंघाएँ। इससे काली खाँसी में लाभ होता है ।

आँरवों की ज्योति के लिए

आँखों की ज्योति कम होने लगे तो Lahsun की पाँच कलियाँ घोट – पीसकर पचास ग्राम पानी मिलाकर उसमें शहद घोलें और पी जाएँ । दो घण्टे के बाद हल्का गर्म दूध पी लें । इससे आँखों की रोशनी तेज़ होगी तथा शरीर को ताकत मिलेगी और बाल भी सफेद नहीं होंगे ।

कान में दर्द

Lahsun का तेल थोड़ा गर्म करके कान में डालने से खुश्की भी दूर होती है और छोटा – मोटा घाव भी सूख जाता है ।

अगर घाव न हो तो Lahsun और अदरक का रस मिलाकर तीन – तीन बूंद कानों में डाल सकते हैं । एक ही कान में दर्द हो तो दो बूंद डालकर थोड़ी देर बाद रूई की बत्ती से कान साफ करें । अदरक और लहसन की एक – एक बूंद मिलाकर ही दो बूंद डालें । कान के दर्द में आराम आएगा ।

कान में फंसी

Lahsun के रस में चार गुना पानी मिलाकर उन दोनों के बराबर ग्लिसरीन घोल लें । फिर इस मिश्रण की 2-3 बूंदें कान में डालें । फैंसी को दबाने और सुखाने में यह बहुत लाभ करता है ।

कान में मवाद होना

तिल के तेल में Lahsun की छिली हुई कलियाँ काटकर आग पर पकाएँ । कलियाँ लाल होने लगें तो तेल छान लें । इस तेल की दो – दो या तीन – तीन बूंद कान में टपकाएँ । दो घण्टे बाद रूई से कान साफ करके दोबारा तेल की बूंद डाल दें और रूई से कान बन्द करके सो जाएँ । दो – तीन दिनों में पीव या मवाद आना बन्द हो जाएगा ।

गला बैठना

पानी में Lahsun का रस डालकर गरारे कीजिए , आवाज़ खुल जाएगी और गले में दर्द भी नहीं रहेगा।गरारों से चैन न मिले तो लहसन की दो – तीन कलियाँ छील – काटकर सिरके में डुबोकर चबाएँ । ऐसा करने से गला खुल जाएगा ।

छाती में दर्द

Lahsun का अर्क निकालिए और उसमें नमक मिलाकर एक चम्मच पिला दीजिए । छाती के दर्द में आराम आएगा , इसके साथ ही सीने पर लेप भी कीजिए और इसके लिए लहसन का रस वैसलीन में मिला लीजिए ।

जुकाम

बीस ग्राम सोंठ , दस ग्राम काली मिर्च , पाँच सौ तुलसी दल , आधा Lahsun , इन सबको पीसकर मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करें । नज़ला – जुकाम जड़ से जाता रहेगा । इसका सेवन रात को करें ताकि सुबह तक आराम हो जाए ।

थकान की टूटन

चाहे आप बीस कोस पैदल चलकर आ रहे हों और रोम रोम थकान से चूर हो गया हो।आराम से बैठकर Lahsun की एक गाँठ छीलकर खा जाएँ । कुछ ही देर थकान – उतर जाएगी ।

पसली चलना

अबोध बच्चों को इससे बड़ी तकलीफ होती है । पाँच सात Lahsun की गाँठे छीलकर उनकी कलियों की माला , गजरे और पाज़ेब बनाएँ । इन्हें रोगी के गले , कलाइयों और पैरों में पहना दें पसली चलना रुक जाएगी और बिलबिलाता हुआ बच्चा मुस्कराने लगेगा ।

फोड़े – फुसी

लहसन पीसकर फोड़े या फँसी पर बाँध दीजिए।घाव के कीड़े मर जाएँगे ।

स्पिरिट में Lahsun का रस मिलाकर फैंसी पर लगाने से भी कीड़े मर जाएँगे । जब – जब लहसनिया स्पिरिट लगाएँ पहले उसी से घाव साफ कर लें और बाद में दूसरी फुरेरी से लगा दें । कुछ दिनों में घाव भरकर साफ त्वचा निकल आएगी ।

पेशाब में रुकावट

Lahsun का रस मिलाकर चाय पीजिए । इससे पेशाब की रुकावट दूर होगी । लहसन की पुल्टिस बनाकर मूत्रेनिंय पर बाँधने से भी मूत्राशय खुल जाता है । पेडू पर लहसन की कलियाँ पीसकर बाँधने से भी पेशाब की रुकावट खुल जाती है ।

पेट का फूलना

बच्चे का दर्द के मारे पेट फूल रहा हो तो Lahsun के रस में थोड़ा घी और नमक मिलाकर उसके पेट पर मुलायम हाथों से मल दें । लहसन की गंध में खूबी यह है कि वह त्वचा में प्रवेश करके मनुष्य के रोम – रोम में फैलकर तकलीफ की जड़ पर वार करती है ।

लहसन , घी और नमक का मिश्रण पोटली में बाँधकर भी बच्चे के पेट को टकोरा जा सकता है । इससे बड़ों की मालिश भी की जा सकती है और उन्हें Lahsun की चटनी खिलाई भी जा सकती है । अपच के कारण फेट फूल रहा हो तो खाली लहसन का रस ही रामबाण की तरह काम करेगा ।

भूरव न लगना

एक Lahsun पूरा छीलकर , थोड़े पुदीन के पत्ते , नमक और काली मिर्च के साथ पीसें और इसी में नीबू निचोड़कर स्वादिष्ट चटनी चाट लें।खुलकर भूख लगेगी ।

मधुमेह

त्रिफले का चूर्ण बना लें और दो रत्ती मुँह में रखकर लहसन की एक – एक करके तीन कलियाँचबा – चबाकरखाएँ । लाभ होगा ।

बेहोशी

बेहोश आदमी की नाक में Lahsun के रस की दो – दो बूंद टपका दें । कुछ ही देर में वह होश में आ जाएगा ।

मोच

लहसन के रस में नमक मिलाकर मोच वाली जगह पर लेप कीजिए । दो दिन सुबह – शाम इसकी मालिश नर्म हाथों से कीजिए।अगर मोच से त्वचा के भीतर ज्यादा टूट – फूट हुई होगी तो हफ्ताभर की मालिश से ठीक हो जाएगी ।

उबकाई

ताज़ा या सूखा Lahsun लेकर उसकी एक कली छीलकर खूब चबाकर निगल जाएँ । दूसरी कली खाते ही हाजमे की डकार आ जाएगी । उबकाई आनी बंद हो जाएगी ।

गुहेरी

चार कलियाँ लहसन की पीसकर दो – तीन बूंद रस निकाल लें और उसमें कपूर घोलकर गुहेरी पर दिन में तीन – चार बार लगाएँ । शाम तक गुहेरी बैठ जाएगी । यह दवा आँख की पुतली से दूर रहे ।

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