Jaiphal KE BEST 9+ UPYOG

Jaiphal KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो Jaiphal   ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास Jaiphal     होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है Jaiphal   के उपयोग।

अन्य भाषाओं में Jaiphal के नाम

संस्कृत – जातिफल , मालतीफल
बंगाली – Jaiphal
हिन्दी – जायफल
अंग्रेज़ी – नट मेग
मराठी – जायफल
लैटिन – मिरिस्टिका
गुजराती -जायफल ऑफिशिनेलिस

परिचय

यह एक जंगली पौधा है , जिसका वृक्ष जावा , सुमात्रा , मलेशिया , गापुर आदि द्वीपों के जंगलों में पाया जाता है । परन्तु हमारे देश में यह दक्षिण भारत में पैदा होता है । इसके वृक्ष की ऊँचाई 10 से 25 मीटर तक होती है । यह वृक्ष बारह महीने हरा – भरा , दिखने में सुन्दर और सुगंधित होता है । इसके फूल पीले रंग के सुगंधित , छत्र के समान मंजरियों में होते हैं ।

इस पर लगे फल गोल , अण्डे के आकार के डेढ़ से तीन इंच तक लम्बे होते हैं और अमरूद के समान लगते हैं । फल पकने पर स्वयं ही ज़मीन पर गिर जाते हैं और फट जाते हैं । इन्हीं फलों के छिलकों को ‘ जावित्री ‘ और फलों के बीजों को Jaiphal कहा जाता है । बाजार में छिलके वाले और बिना छिलके वाले दोनों प्रकार के बीज मिलते हैं ।

प्रयोग में सावधानी

यदि Jaiphal को ज़रूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए तो इसका नशीला प्रभाव पड़ता है । इसके साथ ही सिरदर्द , मूर्छा तथा चक्कर आना आदि लक्षण प्रकट होते हैं । वीर्य इतना पतला हो जाता है कि व्यक्ति नपुंसक भी हो सकता है । इसलिए जिन लोगों की गर्म प्रकृति हो उन्हें जायफल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए ।

विभिन्न रोग व उपचार

एक्ज़िमा

Jaiphal को सिलबट्टे पर रोगी के सुबह के थूक में ( सुबह कुल्ला करने से पहले ) रगड़ें और दिन में केवल एक ही बार प्रभावित जगह पर लगाएँ । कुछ दिनों में एक्ज़िमा से ठुटकारा मिल जाता है ।

पाचन संबंधी रोग

यदि अपच के कारण दस्त आ रहे हों तो Jaiphal का 1 चुटकी चूर्ण सेब के रस या केले के साथ लें । यदि यही मात्रा 1 चम्मच आँवले के रस के साथ ली जाए तो अपच , हिचकी और सुबह होने वाली सुस्ती मिट जाती है ।

वात रोग

Jaiphal को थोड़ा मोटा कूटकर चूर्ण बनाएँ और तिल के तेल में तब तक तलें जब तक वह ब्राउन रंग का न हो जाए । इस तेल को ठंडा करके छान लें और शीशी में भर लें । इस तेल को लगाने से सायटिका , वातजनित दर्द एवं न्यूरेलजिया में बहुत लाभ होता है ।

सिरदर्द

कच्चे दूध में Jaiphal घिसकर माथे पर लगाएँ । सिर दर्द में आराम होता है ।

अनिद्रा , चिड़चिड़ापन और हताशा

Jaiphal का चुटकीभर चूर्ण आँवले के रस में लें तो गहरी नींद आती है । थोड़ा – सा जायफल यदि घिसकर शहद के साथ बच्चों को दिया जाए तो बच्चों को नींद आ जाती है और उनका बिना कारण रोना भी बंद हो जाता है । यह बिल्कुल थोड़ी मात्रा में ही दें अन्यथा इसका बच्चों पर कुप्रभाव पड़ता है । इसे वैद्य के परामर्श के बिना न दें ।

दाँत दर्द

यदि दाँत दर्द हो ( विशेषकर दाँत के खोखले भाग में ) तो Jaiphal के तेल में रूई का फोहा डुबोने के बाद दर्द वाले दाँत के खोखले भाग में रखने से दर्द मिट जाता है ।

यौन क्रिया में उत्तेजना के लिए

Jaiphal का बारीक चूर्ण शहद में डालें और आधे उबले अण्डे के साथ सेवन करें । इसे संभोग से आधा घंटा पहले लेने से स्तंभन हो जाता है और वीर्य स्खलन भी देर से होता है।

कब्ज़ और गैस

Jaiphal को नीबू के रस में घिसकर सुबह – शाम 1-2 चम्मच की मात्रा में लें । पेट की गैस के साथ – साथ कब्ज़ भी दूर हो जाएगा।

सर्दी व नाक से पानी बहना

यदि ठंड के कारण नाक से पतला पानी बह रहा हो तो गाय के दूध में Jaiphal का पेस्ट बनाकर उसी में थोड़ी – सी अफीम डालें । उसका माथे और नाक पर लेप करें ।

नोट : जिनको वमन शीघ्र हो जाता हो और त्वचा सहिष्णु हो वे इस प्रयोग को कदापि न करें ।

मुँहासे और चेहरे के दाग – धब्बे

कच्चे दूध में Jaiphal घिसें और सुबह व रात को चेहरे पर लगाएँ । बाद में चेहरा गुनगुने पानी से धो लें । इससे मुँहासे हट जाएँगे , चेहरे के दाग – धब्बे मिट जाएँगे और चेहरा भी निखरकर कांतियुक्त हो जाएगा ।

नोट : जिनकी त्वचा अधिक सहिष्णु हो , वे यह प्रयोग न करें ।

शरीर में जल की मात्रा कम हो जाना

यदि अधिक दस्त या अधिक वमन के कारण शरीर में पानी की कमी हो तो आधा Jaiphal का चूर्ण आधा लिटर पानी में उबालें । इसके 3 चम्मच नारियल के पानी के साथ एक समय दें।आराम न आए तो खुराक फिर से दें ।

शिशु को ऊपर का दूध न पचना

शिशु को माता का दूध छुड़ा दिया जाता है तो उसे ऊपर के दूध पर रखा जाता है । यदि वह ऐसा दूध नहीं पीता तो Jaiphal का टुकड़ा दूध में डालकर उबालें , फिर दूध ठंडा करके शिशु को पिलाएँ । इससे यह दूध तो पच ही जाएगा , साथ ही मल बँधकर आएगा और उससे आने वाली बदबू भी दूर हो जाएगी ।

Jaiphal के घरेलू उपचार

पिंपल-फ्री स्किन के लिए 1 चम्मच पिसी हुई Jaiphal , 1 चम्मच दही और 1 चम्मच शहद मिलाएं और त्वचा पर लगाएं। सूखने के बाद उन्हें साफ पानी से धो लें।

– ठंड लगने पर एक चुटकी पिसी हुई Jaiphal को एक गिलास दूध के साथ लेने से शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रसवोत्तर, अगर किसी महिला को पीठ दर्द की शिकायत बनी रहती है, तो सुबह और शाम उसके कमर पर घिसा हुआ Jaiphal लगाने से आराम मिलता है।

– जायफल के फायदे बच्चों में होने वाली खांसी और जुकाम को भी खत्म करने में पाए जाते हैं। ऐसा करने के लिए, जमीन Jaiphal और सूखे अदरक को गाय के घी में बराबर मात्रा में मिलाएं और सुबह और रात में बच्चे को चाटें, आपको तुरंत राहत मिलेगी।

अगर कीड़ा लगने की वजह से दांत दर्द हो, तो रूई के फाहे पर जायफल का तेल लें और इसे कीड़ा के दांतों के नीचे 2-3 घंटे के लिए रखें। इससे कीड़ा मर जाएगा।

यदि आप रात को नहीं सोते हैं, तो एक चुटकी पिसी हुई जायफल के साथ शहद मिलाएं और बिस्तर पर जाने से 20 मिनट पहले लें।

Brahmi KE BEST 9+ UPYOG

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