Ghikuvar KE BEST 9+ UPYOG

Ghikuvar KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

अन्य भाषाओं में Ghikuvar के नाम

संस्कृत – घृतकुमारी , गृहकन्या
बंगाली – घृतकुमारी
हिन्दी – ग्वारपाठा , Ghikuvar, घीकुवार
अंग्रेज़ी – बाइँडोल्स एलोज
गुजराती – कुंवारपाठु
लैटिन – एलो इण्डिका रायली
मराठी – कोरकांटा , कोरफड़

Ghikuvar KE BEST 9+ UPYOG
Ghikuvar KE BEST 9+ UPYOG

परिचय

Ghikuvarका पौधा अपने आप ही खेतों के किनारे , जंगल में या नदी किनारे पैदा हो जाता है । इसकी ऊँचाई 2 से 3 फुट तक होती है । ये नीचे से चौड़े और ऊपर तक पहुँचते – पहुँचते इनका अंतिम सिरा नुकीला हो जाता है । इनमें गूदा भरा होता है , जिसमें पर्याप्त मात्रा में गाढ़ी , लेसदार , चिपचिपी गोंद के समान लार होती है । इसके गूदे को सुखाकर ‘ मुसव्वर ‘ नाम का तत्व बनाया जाता है । इस पौधे की अनेक जातियाँ जलवायु के अनुसार अलग – अलग होती हैं । इसके गूदे और फलियों की सब्ज़ी कई प्रांतों में बनाई जाती है ।

प्रयोग

चिकित्सा की दृष्टि से Ghikuvarके पत्तों का ही महत्व है । इन्हीं से गूदा निकलता है । उसी का प्रयोग किया जाता है । इसका प्रयोग उदर रोगों , विशेषतः आमाशय के रोग जैसे अम्लपित्त , यकृत व प्लीहा वृद्धि , उदरशूर तथा रक्तविकार में करते हैं । इसका रजावरोध में प्रयोग करने से भी लाभ होता है।गर्भवती व स्तनपान कराने वाली स्त्रियों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए । इसके गूदे को जले हुए स्थान एवं पुराने व्रण में लगाने से काफी फायदा होता है ।

विभिन्न रोग व उपचार

खाँसी

आधा चम्मच Ghikuvarका रस लेकर उसमें % भाग सोंठ और भाग काली शहद मिलाकर पिलाएँ । खसी में लाभ होता है ।

कफ

यदि कफ अधिक हो , छाती में रुका हुआ हो और बाहर निकालने में कठिनाई हो तो Ghikuvarका रस छाती पर मलें । कफ आसानी से निकल जाता है ।

चोट लगने पर

घाव को साफ करने के बाद घाव पर ग्वारपाठे का रस लगाएँ । ऐसा करने से घाव पकेगा नहीं ।

हिचकी

Ghikuvarके 2 चम्मच रस में आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से हिचकी बंद हो जाती है ।

बवासीर

15 से 30 मिली लीटर ग्वारपाठे का रस पीने को दें । साथ ही ग्वारपाठे के गूदे में हल्दी का चूर्ण मिलाकर मस्सों पर लगाएं । इससे बवासीर में काफी राहत मिलेगी ।

जिगर की सूजन

थोड़ा -सा सेंधानमक या काला नमक डालकर रोगी को ग्वारपाठे का रस पीने को दें । यकृत शोथ में लाभ होता है ।

ज्वर

ग्वारपाठे के रस में हल्दी डालकर रोगी को पिलाएँ और पैरों के पंजों तथा माथे पर इसके रस की मालिश करें । साथ ही रोगी को सुदर्शन चूर्ण भी दें । इससे बुखार उतर जाएगा ।

दाँत का हिलना व दाँत में दर्द

दाँतों पर Ghikuvarका छिलका रगड़ें और चबाएँ । इससे दोनों प्रकार के रोगों में आराम मिलेगा ।

पेट दर्द और वायु विकार

Ghikuvarकी सब्जी बनाकर खिलाएँ । यदि पेट में गैस रुकी हो तो Ghikuvarका गूदा लेकर उसमें जीरा , काला नमक , सेंधानमक और हल्दी मिलाकर रोटी बनाएँ और रोगी को खिलाएँ । इससे गैस और पेट दर्द दोनों को आराम मिलेगा ।
ग्वारपाठे के बारीक टुकड़े काट लें । उसमें जीरा , अजवायन , सेंधानमक और नीबू का रस डालकर शीशी में बंद करके 5-7 दिन पड़ा रहने दें । जब पेट दर्द , गैस और अपचन की शिकायत हो तो तीन टुकड़े मुँह में रखकर रस चूसें या अचार की तरह सेवन करें । लाभ होगा ।

आग से जल जाने पर

ग्वारपाठे के पत्तों को चीरकर उसमें से गूदा निकालकर जले हुए स्थान पर दिन में 2-3 बार लगाएँ । इससे शांति मिलेगी , जलन कम होगी और घाव भी शीघ्र भरेगा ।

शारीरिक बल और पुष्टि के लिए

ग्वारपाठे के 3-4 पत्तों को चीरकर उसमें से गूदा निकालकर गिलोय और नीम के चूर्ण का एक चम्मच मिला लें । इसमें से रोज़ाना 2-4 चम्मच खाएँ तो शरीर में बल की वृद्धि होगी और शरीर पुष्ट होगा ।

सूजन

ग्वारपाठे के गूदे में पिसी हल्दी और जीरा डालकर सूजन के स्थान पर लेप करें । यह प्रयोग कई बार दोहराने से सूजन दूर हो जाती है ।

मासिक धर्म कष्ट से आना

जिन महिलाओं को मासिक धर्म के समय अधिक दर्द होता हो और रक्तस्त्राव खुलकर नहीं आता हो , उन्हें ग्वारपाठे का 25-25 मिली लीटर रस मासिक धर्म प्रारम्भ होने की संभावित तारीख से लेकर मासिकधर्म शुरू होने तक रोज़ाना सुबह – शाम लेना चाहिए ।
यदि मासिक धर्म निश्चित समय पर हो रहा हो और गर्भ स्थापन में कठिनाई हो तो ऐसी महिलाओं को ग्वारपाठे का छिलका तवे पर गर्म करके हल्दी का चूर्ण बुरककर नाभि के निचले हिस्से में बाँध देना चाहिए और ग्वारपाठे का रस भी पीना चाहिए । इससे गी स्थापना में मदद मिलती है ।

गाँठ पड़ना

शरीर में कहीं भी गाँठ हो जाए तो ग्वारपाठे के गूदे में हल्दी का चूर्ण और लहसन मिलाकर प्रभावित स्थान पर गर्म – गर्म लेप करें । ऐसा करने से गाँठ समाप्त हो जाती है ।

पत्तियों के अंदर घी जैसा Ghikuvar चमकदार गूदा होता है। यह हल्के से बदबू आती है और इसमें कड़वा स्वाद होता है।
इसका पदार्थ मुख्य रूप से ठंडा, अस्थि मज्जा बढ़ाने वाला, कामोद्दीपक, विरोधी भड़काऊ और जहरीला है।
यह नेत्र रोगों, यकृत रोगों, बुखार, खांसी, त्वचा रोग, पित्त, पथरी में लाभकारी है। आयुर्वेद में मुख्य औषधियाँ जैसे घृत कारी अचार, कुमारी असवा, कुँवारी पाक, चातु वर्ग भस्म, आदि इसके मुख्य उत्पाद हैं। त्वचा में नयापन लाने के लिए प्राचीन काल से ही इसके उत्पादों का उपयोग किया जाता रहा है।

आयुर्वेद के अनुसार, यह लागू करने के लिए सबसे अच्छा आइटम है, पेट पर अपने pimples बांधने से Ghikuvar पेट की गांठ पिघल जाती है, पेट नरम हो जाता है, और आंतों में जमा मल बाहर निकलता है।
इसमें पाया जाने वाला क्रिसोफेनिक एसिड एक गंभीर जीवाणु नाशक है। इसके पत्तों से प्राप्त लसीका सामग्री जलन, त्वचा रोग, पुराने घाव और बवासीर में फायदेमंद है।
आंखों में इसके गूदे का लेप आंखों की लालिमा और गर्मी को खत्म करता है।

दस दिनों तक काला नमक और अदरक की पत्ती के साथ सुबह शाम पीलिया (पीलिया) होने पर बहुत लाभकारी है। सर्दी खांसी के मामले में, पत्तियों को रस के साथ भरना और शहद के साथ Ghikuvar लेना बहुत फायदेमंद है।
कटिस्नायुशूल या गठिया के मामले में, पत्ती के गूदे का दैनिक सेवन बहुत फायदेमंद है। अपच या पेट खराब होने की स्थिति में सलाद के पत्तों का सेवन करना फायदेमंद होता है।
इस तरह, एलोवेरा एक महत्वपूर्ण औषधि है, अगर आप इसके जेल का इस्तेमाल अपने चेहरे पर करते हैं, Ghikuvar तो दुनिया की कोई भी क्रीम इसे ज्यादा चमक नहीं दे सकती है, खासकर महिलाओं को इसका ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।

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