Chironji KE BEST 9+ UPYOG

Chironji KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो chironji ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास chironji   होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है chironji के उपयोग।

Chironji KE BEST 9+ UPYOG
Chironji KE BEST 9+ UPYOG

चिरौंजी क्या है?

चिरौंजी का पेड़ 12 से 18 मीटर तक ऊँचा होता है और यह पूरे साल एक हरा पौधा होता है। इसकी छाल बहुत मोटी और खुरदरी होती है। इसकी पत्तियाँ एक गोलाकार आकार में 15-20 सेमी लंबी होती हैं, जिसमें एक जालीदार छोर होता है। इसके फल 8-12 मिमी में अंडाकार और गोलाकार होते हैं। इन फलों को तोड़कर जो अनाज इंटीरियर से निकाला जाता है, उसे चिरौंजी कहा जाता है।

अन्य भाषाओं में chironji के नाम

संस्कृत – बहुलवल्कल , प्रियाल
तेलुगु – सारड़ , सारूपपु
हिन्दी – chironji
मराठी – चारोली
गुजराती – चारोली
बंगाली – पियाल
तमिल – काटमरा
फारसी – नुकलेखाज़ा
अंग्रेज़ी – दि कुडप्पा आमण्ड
लैटिन – बुचानिया लेट्रिफोलिया

परिचय

chironji का उपयोग सूखे मेवे के रूप में मिठाई , हलवा , खीर आदि खाद्य व्यंजनों में किया जाता है ।

chironji का वृक्ष 40 से 50 फुट ऊँचा होता है । प्रायः यह सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है । इसके पत्ते लंबे व मोटे होते हैं । इसके पत्तों से पत्तलें बनाई जाती हैं । इसके वृक्ष पर गोल और काले कत्थई रंग का फल लगता है । इसके फल छोटे – छोटे होते हैं । फूलों के अंदर से उसकी गुठली को फोड़कर मींगी निकालते हैं । यह मींगी अरहर के समान लगती है जिसे chironji कहते हैं । इसकी फसल अप्रैल – मई में आती है । इस वृक्ष की छाया बहुत ठंडी होती है ।

प्रयोग

chironji खाने में स्वादिष्ट और बल प्रदान करने वाली है।यह दुर्बलता को दूर करती है । इसके प्रयोग से आलस्य दूर होता है और कार्य करने की क्षमता बढ़ती है । इसकी प्रकृति शीतल और रुचिकर होती है । इसका उपयोग रक्तातिसार , खुजली , पित्ती , मुँहासे में किया जाता है ।

विभिन्न रोग व उपचार

पित्ती

chironji खाने से पित्ती में फायदा होता है ।

शीतपित्त शीतपित्त के दाफड़ होने पर chironji को दूध में पीसकर लेप करने से आराम होता है । 20-25 ग्राम chironji खूब चबा – चबाकर खाने से भी पित्ती में फायदा होता है ।

रक्तपित्त chironji और मुलहठी से सिद्ध दूध पीने से रक्तपित्त ठीक हो जाता है ।

चेहरे की झाइयाँ

chironji , हल्दी व मजीठ को दूध में पीसकर चेहरे पर लेप करें । 2-3 घंटे इस लेप को लगा रहने दें । फिर गर्म पानी से मुँह धो लें । कुछ ही दिनों में झाईयाँ मिट जाएँगी ।

सिरदर्द

chironji , बादाम की गिरी , बीज निकाले खजूर , ककड़ी के बीज और तिल , प्रत्येक समभाग लेकर , दूध या पानी में पीसकर 8-10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गैस के कारण उत्पन्न सिरदर्द मिटता है ।

दुर्बलता

125 ग्राम chironji को कड़ाही में भूनकर इसमें आधा किलो शक्कर की गाढ़ी चाशनी डालकर बर्फी जमा लें ।10 से 20 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ इस बर्फी का सेवन करें । यह बर्फी बल और वीर्यवर्द्धक तथा नपुंसकता निवारक है ।

खुजली

100 ग्राम chironji व 10 ग्राम पिसा सुहागा , गुलाब जल के साथ पीसकर पतला लेप बनाकर जहाँ – जहाँ गीली खुजली हो वहाँ पर लेप करें । 3-4 दिन में खुजली समाप्त हो जाती है ।

chironji को गुलाबजल में पीसकर , मालिश करने से चेहरे की फुसियाँ तथा खुजली मिटती है ।

उच्च रक्तचाप

प्रतिदिन 3 दाने chironji खाकर , ऊपर से ताज़ा पानी पीने से उच्च रक्तचाप सामान्य होने लगता है ।

रक्तातिसार

chironji के वृक्ष की छाल को दूध में पीसकर शहद के साथ पीना चाहिए । शल्लकी , बेरी , जामुन , chironji , आम या अर्जुन में से किसी एक की छाल का चूर्ण , शहद से चाटकर ऊपर से दूध पीने से रक्तातिसार में लाभ होता है ।

मुँहासे

chironji को पानी में पीसकर चेहरे और मुँहासों पर लगाने से चेहरे की त्वचा निखरती है । मुँहासे ठीक होते हैं तथा चेहरे पर रौनक आती है ।

chironji और नारंगी के छिलकों को दूध के साथ पीसकर चेहरे पर लेप करें । सूखने लगे तब रगड़कर थोड़ी देर बाद धो लें । मुँहासों में लाभ होता है तथा चेहरे की त्वचा में निखार आता है ।

लकवा

chironji , बादाम की गिरी , चिलगोजे की गिरी व पिस्ता , इन सभी को समभाग लेकर पीसकर , इसमें शहद मिला लें । 15 से 20 ग्राम की मात्रा सेवन कर ऊपर से गाय का दूध पीएँ । इससे लकवे के रोगी को तथा अन्य वायु विकार से ग्रस्त रोगी को लाभ होता है।

जुकाम – रवाँसी

चिरौंजी को पीसकर , घी में छौंककर , दूध मिलाकर पकाएँ । 1-2 उबाल आने पर इसमें 2-3 इलायची का चूर्ण तथा आवश्यकतानुसार शक्कर डालकर गुनगुना सेवन करने से जुकाम तथा खाँसी में लाभ होता है ।

मुँह के रोग

मुँह में छाले होने , मुँह फटने और जीभ लाल होने पर chironji के 4-5 दाने मुँह में डालकर खूब देर तक चबा चबाकर इसका रस मुँह में इधर – उधर घुमाते रहें । फिर निगल जाएँ । फिर 4-5 दाने मुँह में डालकर इसी तरह चबाएँ । इस प्रकार कई बार खाएँ । इससे मुँह के रोगों में लाभ होता है ।

मकड़ी के ज़हर पर

चिरौंजी को पीसकर , उसमें तिल का तेल मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएँ । फफोलों एवं जलन में आराम होगा तथा विष का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।

शरीर पर रवाज के साथ ददोड़े होना

आँवला , अजवायन और स्याह जीरा , समभाग लेकर पीस लें । यह चूर्ण 3 ग्राम , चिरौंजी 5 ग्राम और गुड़ 5 ग्राम मिलाकर सेवन करने से खाज के साथ ददोड़ों में भी लाभ होता है तथा इससे उछली हुई पित्ती भी शान्त होती है ।

मुरव सौंदर्य

चिरौंजी को गुलाबजल के साथ महीन पीस लें । इसका लेप चेहरे पर लगाएँ।सूखने लगे तब इसे खूब रगड़ें और थोड़ी देर बाद धोकर साफ कर लें । इसे पहले सप्ताह तक प्रतिदिन , फिर सप्ताह में 2 बार लगाते रहें । इससे चेहरा खिला – खिला रहेगा और त्वचा सुन्दर , चिकनी और चमकदार हो जाएगी ।

चिरौंजी पिंपल्स को खत्म करने में मदद करता है।
यदि आप पिंपल्स से परेशान हैं और कोई उपाय नहीं सोचते हैं, तो एक बार चिरौंजी का उपयोग करें। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि चिरौंजी को गुलाब जल में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुंहासे जल्दी ठीक होते हैं।

 

नाक कान से खून बहने (रक्तस्राव) की समस्या को हल करती है। चिरौंजी नाक और कान से खून बहने को कम करने में मदद करता है
गर्मियों के मौसम में बहुत से लोग नाक और कान से खून आने की समस्या से परेशान रहते हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं, तो चिरौंजी पका हुआ दूध खाएं। इससे नाक (कान) से खून आने की समस्या ठीक हो जाती है।

 

चिरौंजी हिंदी में शरीर की ताकत में सुधार करता है
अगर आप थोड़ी मेहनत के बाद शारीरिक रूप से कमजोर या थके हुए हैं, तो चिरौंजी खाना आपके लिए फायदेमंद है। ताजा चिरौंजी खाने या चिरौंजी का हलवा दूध के साथ खाने से शरीर को ताकत और पोषण मिलता है।

 

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