Chhuhaara KE BEST 9+ UPYOG

Chhuhaara KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो chhuhaara ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास chhuhaara   होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है chhuhaara के उपयोग।

Chhuhaara KE BEST 9+ UPYOG

अन्य भाषाओं में chhuhaara के नाम

संस्कृत – भूमिखर्जूरिका , दुरारोहा , स्वाद्वी
तेलेगु – खजूर , पंडु , खजूर
हिन्दी – छुहारा , पिंड खजूर , खजूर
तमिल – इंजुकचुर , पेरेण्डु
पंजाबी – खाजि , खजूर
मराठी – शिंदी , खजूरी , खांरिक
गुजराती – छुवारी , खरिक , खर्जूरी
अंग्रेज़ी – डेटपाम
बंगाली – खजूर , छोहारा , सोहारा
लैटिन – फोनिक्स सिल्वैस्टरिज
फारसी – खुरमा , खुमतिर

 

परिचय

छुहारा खजूर का सूखा रूप होता है । chhuhaara का प्रयोग मेवे के रूप में किया जाता है । खजूर के वृक्ष सारे भारतवर्ष में पाए जाते हैं । सिंध और पंजाब में इसकी खेती विशेष रूप से की जाती है । अरब देशों में व उत्तरी अफ्रीका में पिण्डखजूर पैदा होता है । अरब निवासी तो खजूर खाकर ही बहुत दिन व्यतीत कर देते हैं ।

खजूर के वृक्ष की ऊँचाई लगभग 30 से 50 फुट तक होती है । इसकी लकड़ी जलाने के काम आती है । इसके पत्तों से झाडू व पंखे आदि बनाए जाते हैं । इसके फल पाचक और पौष्टिक होते हैं । जिन फलों को अधकच्चा सुखा लिया जाता है उन्हें छुहारा कहते हैं । इसके दो प्रकार हैं- खजूर , पिण्डखजूर । इसकी गुठलियों का तेल निकाला जाता है , जो जलाने और औषधियों में डालने के काम आता है ।

प्रयोग

खजूर शीतवीर्य होता है पर सूखने पर छुहारा गर्म प्रकृति का हो जाता है । यह भ्रांति , भ्रम , मूर्छा , रक्तपित्त और दाह का नाश करता है । इसका प्रयोग दमा , कब्ज , श्वास रोग , उल्टी , कफ , ज्वर आदि में किया जाता है । खाँसी ,

विभिन्न रोग व उपचार

कब्ज़

4-5 chhuhaara रात को दूध में उबालकर खाने से कब्ज दूर होता है । खजूर को पानी में भिगोकर पीने से दस्त साफ आता है ।

रवाँसी

खजूर , किशमिश , छोटी पीपल , शक्कर , घी और शहद समभाग लेकर पीस लें । 20 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सुबह – शाम लेने से हर प्रकार की खाँसी व दमा में लाभ होता

सिर दर्द

chhuhaara की गुठली को पानी में घिसकर माथे पर लेप करने से कैसा भी सिर दर्द हो दूर हो जाता है ।

रक्त वृद्धि

खजूर की गुठली निकालकर 200 ग्राम गूदा 75 ग्राम गाय के घी में भूनकर , हलवा बनाकर खाने से रक्त में वृद्धि होती है ।

दुर्बलता

4-5 chhuhaara 1 गिलास दूध में उबालकर ठंडा कर लें । इसे सुबह या रात को सोते समय गुठली निकालकर , छुहारों को खूब चबा – चबाकर खाएँ और ऊपर से दूध पी जाएँ । सर्दी के मौसम में लगातार 3 माह तक सेवन करें । इससे शरीर का दुबलापन दूर हो जाता है । सौन्दर्य में वृद्धि होती है । बल और वीर्य की वृद्धि होती है तथा बाल लम्बे व घने हो जाते हैं ।

भूरव खुलना

chhuhaara का गूदा दूध में पकाएँ । कस उतर जाने पर आँच से उतार लें । इस दूध को पीने से भूख खुलती है तथा भोजन भी शीघ्र पच जाता है । खजूर की चटनी बनाकर खाने से भोजन में रुचि उत्पन्न होती है ।

दाँतों की चमक

खजूर की गुठलियों से तैयार मंजन से दाँत साफ करने पर दाँत चमक उठते हैं और उनमें मज़बूती आती है ।

शराब का नशा

खजूर के फलों को पानी में गलाकर , मसलकर , छानकर पिलाएँ । शराब का नशा उतर जाएगा ।

कमर दर्द

chhuhaara को पानी में उबालकर , उसमें मेथी डालकर पीने से कमर दर्द ठीक होता है ।

मासिक विकार

स्त्रियों के पेट में दर्द होकर , मासिक स्राव साफ न आने पर छुहारों का 1 तोला चूर्ण घी के साथ रोज़ प्रातः – सायं लगातार 3 माह तक सेवन कराने से मासिक स्राव संबंधी सभी प्रकार के विकार दूर हो जाते हैं ।

आँरव की गुहेरी

chhuhaara की गुठली को पानी के साथ घिसकर आँख की पलक की गुहेरी पर लेप करने से गुहेरी ठीक हो जाती है ।

दमा

प्रतिदिन सुबह – शाम 2-2 chhuhaara खूब चबा – चबाकर खाएँ एवं गुनगुना पानी पीएँ इससे दमा के रोगी को लाभ होता है । इससे फेफड़ों को ताकत मिलती है तथा सर्दी व कफ का प्रकोप कम होता है ।

प्यास

गर्मियों के दिनों में chhuhaara की गुठली मुँह में रखने से प्यास की तीव्रता कम हो जाती है ।

याव

chhuhaara की गुठली को पानी में , पत्थर पर घिसकर घाव पर लेप करने से घाव ठीक हो जाता है ।

शारीरिक शक्ति में वृद्धि

खजूर को कूटकर , उसमें पिस्ता , बादाम , चिरौंजी आदि डालकर , घी मिलाकर लेने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है ।

सर्दी – जुकाम

4-5 खजूर की गुठली निकालकर 250 मिली लीटर दूध में उबालकर इसमें 4-5 काली मिर्च व इलायची डालकर उबालें । इसमें 1 चम्मच घी डालकर पीने से सर्दी , जुकाम , , खाँसी , बुखार आदि रोगों से मुक्ति मिलती है ।

बलगम

chhuhaara को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार खाने से खाँसी और बलगम की शिकायत दूर होती है ।

मूत्ररोग

1-2 chhuhaara रात को सोते समय खाने से बच्चों के बिस्तर में पेशाब करने या वृद्धों को बार – बार , थोड़ा – थोड़ा पेशाब जाने की शिकायत दूर होती है ।

यौन दौर्बल्य

1 chhuhaara को लम्बाई में काटकर गुठली निकाल लें । अब इसमें 4-5 डंडी शुद्ध केसर भरकर , chhuhaara को बंद करके धागे से बाँध दें । फिर 300 मिली लीटर दूध में इसे डालकर धीमी आँच पर दूध आधा रहने तक उबालें । फिर उतारकर ठंडा कर लें । chhuhaara को खूब मसलकर छानें और लुगदी फेंक दें और 1-1 घुट करके पी लें । इसके बाद पानी न पीएँ । इसके सेवन से यौन शक्ति बढ़ती है । साथ ही यह शक्तिदायक , बलवर्धक और यौन रोगों में लाभकारी है ।

दिल की दुर्बलता

खजूर को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उसी पानी के साथ पी लेने से दिल की दुर्बलता दूर होती है ।

शीघ्र पतन

प्रतिदिन 2-2 chhuhaara प्रातःकाल खाने से शीघ्र पतन व वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है । प्रातःकाल खाली पेट 2 chhuhaara टोपी सहित 2 सप्ताह तक खूब चबा – चबाकर , तीसरे सप्ताह में 3 chhuhaara और चौथे सप्ताह में 4 chhuhaara रोज़ खाएँ ।

4 से ज्यादा chhuhaara न खाएँ । साथ ही रात को इसी मात्रा में दूध में औंटाकर खूब चबा चबाकर खाएँ । 3 माह तक यह प्रयोग करने से शरीर पुष्ट और सुडौल बनता है और पुरुषों का शीघ्र पतन रोग भी नष्ट हो जाता है ।

पित्त शमन

chhuhaara की गुठलियाँ निकालकर थोड़ा कूटें और उसमें बादाम , पिस्ता , बिहीदाने , चिरौंजी और शक्कर डालकर यह मिश्रण पतले घी में भिगो दें ।8 दिन बाद प्रात : 2 तोला मात्रा में सेवन करें । धातु पुष्टि और पित्त का शमन करने में लाभदायक है ।

Baheda KE BEST 9+ UPYOG

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