Brahmi KE BEST 9+ UPYOG

Brahmi KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

अन्य भाषाओं में Brahmi  नाम

संस्कृत – सोमवल्ली , कपोतबंका , सरस्वती
बंगाली – विर्मि , धुलकुड़ी
हिन्दी – Brahmi , ब्रह्मी
अंग्रेज़ी – बकोपार्मानिसरा
मराठी – Brahmi
लैटिन – ग्रेशओला मोनीरा लिन
गुजराती – Brahmi

Brahmi KE BEST 9+ UPYOG
Brahmi KE BEST 9+ UPYOG

परिचय

यह अधिकतर नहरों , नालों तथा जलाशयों के किनारे पर पाई जाती है । यह भारत के आर्द्र और शीत प्रदेशों में पाई जाती है । ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे और उत्तरी बंगाल में भी यह बहुत अधिक मिलती है । मानसरोवर की ओर तो Brahmi का भरपूर भण्डार है ।

Brahmi बेल की तरह ज़मीन पर छितरी होती है । असली Brahmi वही मानी जाती है जिसके पत्ते अठन्नी के सिक्के की तरह गोल , किनारों की ओर थोड़े से नुकीले , हरे , जर्दी , काइली और दलदार होते हैं।डण्डी की ओर वाला भाग खुला होता है ।

प्रयोग

इसके सेवन करने से याददाश्त बढ़ती है । यह दिल , दिमाग और जिगर को ताकत देती है । Brahmi मूत्र की बिमारी दूर करती है । इसका घी इस्तेमाल करने से उन्माद और अपस्मार मिटते हैं और नज़र तेज़ होती है ।
ग्राम मिलाकर पीस लें । रोजाना 1-1 चम्मच की मात्रा दूध

विभिन्न रोग व उपचार

स्मरणशक्ति

स्मरणशक्ति तेज़ करने के लिए 5 ग्राम Brahmi के चूर्ण में 5-6 काली मिर्च पीसकर दूध के साथ रोज़ाना प्रात : -सायं सेवन करने से लाभ होता है ।

Brahmi का ताज़ा रस लेकर , उसमें समभाग घी मिलाकर घी सिद्ध कर लें । इस घी को 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से स्मरणशक्ति बढ़ती है । इसके पंचांग का चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से याददाश्त तेज़ होती है ।

दिमाग की कमजोरी

जिन्हें भूलने की आदत हो और दिमाग कमज़ोर हो तो वे बादाम की गिरी एवं Brahmi 50-50 ग्राम , काली मिर्च 15 के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करें । साथ ही Brahmi तेल की सिर पर मालिश करें । दिमाग की कमजोरी दूर हो जाती है ।

अनिद्रा

Brahmi और शंखपुष्पी का चूर्ण ढाई – ढाई ग्राम रोज़ाना मिलाकर सोने से एक घंटा पहले दूध के साथ सेवन करें । अनिद्रा रोग में लाभ होता है ।

Brahmi का 5 ग्राम चूर्ण गाय के 1 लीटर दूध में घोट छानकर 10 दिन तक सेवन करने से पुराने निद्रानाश रोग में लाभ होता है ।
Brahmi का रस कच्चे दूध में मिलाकर पीने से अनिद्रा रोग में लाभ होता है । ताज़ी Brahmi उपलब्ध न हो तो Brahmi चूर्ण का प्रयोग करें ।

मधुर आवाज़

सूखी Brahmi 50 ग्राम , मुनक्का 50 ग्राम , शंखपुष्पी 25 ग्राम , सबको चौगुने पानी में मिलाकर अर्क निकालें । इसके प्रयोग से शरीर स्वस्थ और आवाज़ साफ हो जाती है ।

उच्च रक्तचाप

Brahmi के पत्तों का स्वरस 1 चम्मच और शहद आधा चम्मच मिलाकर लेने से बढ़े हुए रक्त का दबाव सामान्य हो जाता है । इसे आवश्यकतानुसार दिन में 2-4 बार सेवन करें ।

बालों के लिए

बाल झड़ने पर Brahmi के पंचांग का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में सुबह – शाम नियमित रूप से कुछ हफ्ते सेवन करें । यह प्रयोग निर्बलता निवारण में भी लाभप्रद है ।

दाह

5 ग्राम Brahmi के साथ धनिया मिला रात को भिगोकर प्राप्तः पीस – छानकर मिश्री मिलाकर पिलाएँ । दाह में आराम आता है ।

अन्य भाषाओं में इसके नाम
संस्कृत – जटामांसी , भूतजटा
बंगाली – जटामांसी
हिन्दी – जटामांसी , बालछड़
अंग्रेज़ी – स्पाइकनार्ड
मराठी – जटामांसी
लैटिन – नॉर्टोस्टेक्सि जटामांसी
गुजराती – बालछड़ा , जटामांसी

परिचय
यह पहाड़ों की ढलानों पर पैदा होने वाला पौधा है जिसकी ऊँचाई लगभग 50 से 60 सें.मी. तक होती है । यह केवल ठंडे इलाकों में ही पैदा होता है । इसलिए यह अन्य स्थानों पर नहीं पाया जाता । इसके कंद में बाल जैसे तंतु लगे होते हैं । इसलिए इसे जटामांसी कहते हैं । एलोपैथी में इसे वेलेरियन दवा के समकक्ष माना जाता है । क्योंकि इन दोनों औषधियों के गुण प्रायः समान हैं ।

प्रयोग
यह पौष्टिक और बलदायनी है । यह दिल , जिगर तथा पेट के रोगों को दूर करती है । यह बालों को काला करती है । हृदय की बेचैनी , पेट में अफारा तथा मासिक धर्म संबंधी अनेक रोगों में इसका प्रयोग किया जाता है । नेत्र की ज्योति बढ़ाने में भी यह उपयोगी है ।

विभिन्न रोग व उपचार
दिल की धड़कन बढ़ना
1 चम्मच दालचीनी में आधा चम्मच जटामांसी का चूर्ण और एक चुटकी कपूर मिलाकर रोज़ाना सुबह – शाम लें और जब तक दिल की धड़कन सामान्य न हो जाए यही खुराक लेते रहें ।

अनिद्रा

जटामांसी का 1 चम्मच चूर्ण पानी के साथ रात को सोने से 1 घंटा पहले लें । अनद्रिा रोग में इससे लाभ होता है ।

मिर्गी रोग
जब मिर्गी रोग में दौरा पड़े और रोगी बेहोश हो जाए तो जटामांसी का चूर्ण नथुने में लगाकर सुंघाएँ । बेहोशी दूर हो जाएगी ।

उच्च रक्तचाप
जटामांसी , असगंध और Brahmi तीनों को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएँ और दिन में पानी के साथ 2-3 बार सेवन करें । उच्च रक्तचाप में लाभ होता है ।

मासिक धर्म की अनियमितता

जटामांसी मासिक धर्म के प्रवाह को नियमित करके मासिक धर्म के चक्र को भी नियमित करती है । यह मासिक धर्म के वेदनापूर्ण , रुक – रुककर होने वाले या रुक जाने पर भी लाभकारी है।मासिक धर्म के दौरान होने वाला अवसाद , चिड़चिड़ापन , थकावट , कमज़ोरी एवं पीड़ा को दूर करने के लिए 4 : 2 : 1 ) का चूर्ण बनाएँ और दिन में 3-4 बार रोज़ाना सेवन करें ।

दाँतों व मसूड़ों के रोग
जटामांसी का चूर्ण बारीक करके रोज़ाना मंजन की तरह दाँतों पर मलें और मसूड़ों की मालिश करें । ऐसा करने से दाँतों व मसूड़ों का दर्द , खून – पीप आना , मुँह की बदबू आदि रोगं समाप्त हो जाते हैं ।

पेट दर्द
सोंठ , आँवला , कालानमक और जटामांसी का चूर्ण समान मात्रा में लेकर दिन में 3-4 बार गुनगुने व गर्म पानी से सेवन करें । पेट दर्द में आराम आता है ।

चेहरे की त्वचा का निरवार

चेहरे की त्वचा में निखार लाने और इसे बरकरार रखने के लिए गुलाबजल में जटामांसी की जड़ को घिसकर चेहरे पर लेप करें । 1 घंटे बाद चेहरे को पानी से धो लें ।

नपुंसकता जटामांसी , लौंग , जायफल , सौंठ समान मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार करें और दिन में 2-3 बार 1-1 चम्मच की मात्रा में दूध से लें । नपुंसकता दूर होती है ।

हिस्टीरिया

यह रोग प्रायः स्त्रियों को होता है । जिसका मुख्य कारण तनाव ही माना जाता है । ( 4 : 2 : 1 ) के अनुपात में जटामांसी की जड़ का चूर्ण , वच का चूर्ण और काला नमक मिलाकर 1 सप्ताह तक रोज़ाना सुबह – सायंशहद के साथ आधा चम्मच

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