Badam KE BEST 9+ UPYOG

Badam KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो Badam ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास Badam   होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है Badam के उपयोग।

Badam KE BEST 9+ UPYOG
Badam KE BEST 9+ UPYOG

अन्य भाषाओं में इसके नाम

तमिल – नटबडुम
संस्कृत – वाताद , वातवैरी
तेलुगु – बदम , बेदम
हिन्दी – Badam
गुजराती – बदाम
मलयालम – वाताय कोट्टई
बंगाली – Badam
अंग्रेज़ी – आमण्ड
फारसी – बदामशिरी
लैटिन – एमिग्डेलस कम्युनीस

परिचय

Badam पौष्टिक मेवा है । Badam में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । इसका उपयोग खाद्य व्यंजनों में हलवा , मिठाई , ठंडाई आदि में सूखे मेवे के रूप में किया जाता है ।

Badam का पेड़ बड़ा होता है । इसके पत्ते कुछ भूरे होते हैं तथा फल सफेद होते हैं । इसकी दो जातियाँ होती हैं- मीठी और कड़वी । बदाम का छिलका कठोर होता है जिसे फोड़कर गिरी निकाली जाती है जिसे Badam कहते हैं । इसका कच्चा फल हरा होता है और सूखने के बाद यह पीला कत्थई रंग का होता है । बदाम का तेल भी निकाला जाता है । इसका तेल हल्का पीला , हल्का – सा गंधयुक्त , स्वादरहित और बहुत गुणकारी होता है ।

कड़वे Badam का केवल औषधियों के रूप में ही उपयोग होता है । इसे दाद , झाई और चेहरे का रंग निखारने के लिए किया जाता है । वैसे कड़वे बदाम के तेल का प्रयोग कान दर्द , कान के कीड़े मारने और कान की आवाजें रोकने के लिए किया जाता है ।

प्रयोग

Badam का प्रयोग शारीरिक पौष्टिकता एवं दिमागी ताकत के लिए , स्नायुविक सुदृढ़ता , सिर की तरावट , केश रक्षा , नेत्रज्योति की वृद्धि , वात – पित्तजन्य विकारों के शमन , बल , वीर्य और यौनशक्ति की वृद्धि के लिए किया जाता है । बदाम सूखा और भिगोया हुआ दोनों ही रूपों में लाभदायक और बलवर्धक होता है ।

विभिन्न रोग व उपचार

मस्तिष्क की दुर्बलता

8-10 बदाम रात को पानी में भिगोकर प्रातः इन्हें छीलकर , मिश्री व 10 ग्राम मक्खन मिलाकर 2 माह तक खाने से मस्तिष्क की दुर्बलता दूर होती है ।

5 Badam रात को पानी में भिगोकर प्रातः सिल पर घिसकर दूध में मिलाकर नियमित रूप से पीने से दिमागी कमज़ोरी दूर होती है ।

स्मरणशक्ति में वृद्धि

7-8 Badam , 10 ग्राम सौंफ पीसकर मिला लें । लगभग 40-45 दिन तक रोज़ रात्रि में गर्म दूध के साथ लेने से मस्तिष्क की कमज़ोरी दूर होती है तथा नेत्रज्योति व स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है ।

कमर दर्द

Badam के तेल की कमर में मालिश करने से कमर दर्द शीघ्र ही दूर हो जाता है ।

बाल झड़ना

बालों में Badam का तेल लगाने से बाल मुलायम होते हैं और उनका गिरना बंद हो जाता है ।

श्वास विकार

Badam का तेल , प्याज़ और अदरक का रस 10-10 बूंद सबको मिलाकर 15 दिन तक , दिन में 3 बार पीने से काली खाँसी , दमा और गले के विकार दूर होते हैं ।

रवाँसी

Badam का तेल और शहद मिलाकर चाटने से सूखी खाँसी मिटती है तथा गले की खराश दूर होती है ।

बदाम की गिरी , मुलहठी का महीन चूर्ण तथा बीज निकाले हुए मुनक्का , तीनों समभाग लेकर खरल में थोड़े पानी के साथ पीसकर चने के बराबर गोलियाँ बना लें । दिन में 4-5 बार 1-1 गोली मुँह में रखकर चूसें । यह गोलियाँ सभी प्रकार की खाँसी दूर करती हैं ।

दुर्बलता

गर्म कर ठंडे किए गए दूध में 5-7 मिली लीटर बदाम का तेल और 10 ग्राम शहद मिलाकर पीने से बल और वीर्य बढ़ता है तथा दुर्बलता दूर होती है ।

अविकसित स्तन

बदाम के तेल की रोज़ाना मालिश करते रहने से स्तन विकसित और परिपुष्ट होते हैं ।

लकवा

बदाम , पिस्ता , चिरौंजी और कुलिंजन का चूर्ण , प्रत्येक समभाग लेकर पीस लें । उसमें शहद मिलाकर रोगी को चटाएँ । लकवे में आराम होता है ।

दंत रोग

Badam के छिलके जलाकर राख बना लें और राख से 1 चौथाई भाग में सेंधानमक मिलाकर 3 बार छान लें । इसका मंजन करने से दाँत मज़बूत और मसूड़े निरोग रहते हैं । 1 तोला बदाम के छिलके जलाकर , समभाग भुनी हुई फिटकरी मिलाकर महीन पीस लें और शीशी में भर लें । इसे दाँतों पर मलने से दाँत दर्द , दाँतों का हिलना व दाँतों से खून रिसना आदि बंद हो जाता है ।

बदाम के छिलके ( जले हुए ) , फिटकरी , सेंधानमक , अकरकरा , पिप्पली , सफेद चंदन व मुश्क कपूर , इन सबको एक साथ महीन पीस लें । सुबह – शाम इसका मंजन करने से 1 माह में पायरिया जड़ से नष्ट हो जाएगा ।

रक्ताल्पता

बदाम के नियमित सेवन से खून की कमी दूर हो जाती

चेहरे पर निरवार

रात को पानी में बदाम भिगोकर , प्रातः छीलकर पीस लें और दूध में मिलाकर पी लें । इसके नियमित सेवन से चेहरे की कांति बढ़ती है और चेहरे पर रौनक आती है ।

बदाम का तेल चेहरे पर लगाने से चेहरे पर अनोखा निखार आता है ।

शरीर बलिष्ठ करने के लिए

रात को 10-12 Badam भिगोकर , छीलकर , बारीक पीसकर , धीमी आँच पर पकाकर लाल कर लें । इसमें आवश्यकतानुसार मीठा दूध मिलाकर पीएँ । कुछ दिनों तक पीने से शरीर बलिष्ठ और मोटा हो जाएगा ।

नेत्र विकार बदाम की गिरी रात को भिगोकर , प्रातः छीलकर दूध के साथ खाने से आँख से पानी आना , आँखों की दुर्बलता , आँख आना , नेत्र पीड़ा , धुन्ध आना , नेत्रों की थकान , कम दिखना आदि नेत्र विकार दूर होते हैं ।

पेशाब में जलन

बदाम की 7-8 गिरी भिगो दें फिर इन्हें छीलकर 7 छोटी इलायची को छीलकर दोनों को पीस लें और इसमें 1 गिलास पानी मिलाकर आवश्यकतानुसार मिश्री मिला लें । इसे रोज़ाना 3 बार पीने से पेशाब करते समय होने वाली जलन दूर होती है ।

सिरदर्द

Badam और केसर को गाय के घी में मिलाकर नस्य लेने से सिरदर्द व अन्य प्रकार के शिरोरोग दूर होते हैं।

बदाम और कपूर को दूध में घिसकर मस्तक पर लेप करने से सिरदर्द शीघ्र दूर होता है ।

सिरदर्द होने पर रोजाना प्रात : 3 दिन तक बदाम की खीर खाएँ ।

कब्ज़

1 गिलास गर्म दूध में 3 से 5 मिलीलीटर Badam का तेल मिलाकर पीने से कब्ज दूर होती है तथा मूत्राशय की सूजन , मूत्राशय की पथरी आदि में लाभ होता है।

कम्पवात

1 महीने तक लगातार 2-3 बदाम की गिरी पानी में भिगोकर , छीलकर , पत्थर पर थोड़ा पानी से घिसकर उसमें समभाग शहद मिलाकर चाटने से कम्पन बाय में लाभ होता है ।

नपुंसकता

बदाम का नियमित सेवन करते रहने से नपुंसकता दूर होती है ।

स्वप्नदोष

5 बदाम की गिरी ( भिगोकर छिली हुई ) व 5 ग्राम मिश्री पीसकर उसमें 3 ग्राम घी व 6 ग्राम शहद मिलाकर सुबह – शाम चाटने से शीघ्र ही स्वप्नदोष दूर हो जाता है ।

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