Ashok ke Best 9+ upyog

Ashok ke Best 9+ upyog jo aapko janna chaiye

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो Ashok ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास Ashok  होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है Ashok के उपयोग।

Ashok ke Best 9+ upyog
Ashok ke Best 9+ upyog

अन्य भाषाओं में Ashok नाम

संस्कृत – ताम्रपल्लव ,
बंगाली -अस्पाल हेमपुष्प , Ashok
तेलगु – अशोकम् , नांजूलामु
हिन्दी – Ashok
पंजाबी – Ashok
गुजराती – आसोपालव
अंग्रेज़ी – Ashok ट्री
मराठी – अशोपक
लैटिन – ग्वेटेरिया लोंगी फोलिया

परिचय

Ashok वृक्ष सड़कों के किनारे लगाए हुए मिलते हैं । इस वृक्ष की ऊँचाई लगभग 30 फुट होती है । यह वृक्ष सदा हरा – भरा रहता है । इसके पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं । कोपलें ताम्रवर्ण की , फूल चमकदार , सुहावने , रक्ताभ रंग के आते हैं । फली लम्बी , चौड़ी व चपटी होती है , जिसमें चपटे बीज होते हैं । बसन्तऋतु में इस पर फूल तथा शरदऋतु में फल लगते हैं|

प्रयोग

Ashok का प्रयोग मुख्यतः स्त्री रोगों में अधिक होता है । जैसे – रक्तप्रदर , श्वेतप्रदर आदि तथा इसके सेवन करने से मासिकधर्म की अनियमितता भी सुधर जाती है । इसके अतिरिक्त यह अतिसारनाशक , रक्तस्तम्भक , रक्तशोधक व शोथहर है । गर्भवती स्त्रियों को प्रसव के बाद इसका क्वाथ या अशोकारिष्ट देने से प्रसव के पश्चात माता के स्वास्थ्य में शीघ्र ही सुधार आने लगता है ।

विभिन्न रोग व उपचार

पथरी

Ashok के.1-2 ग्राम बीजों को पानी में पीसकर नियमित रूप से दो चम्मच मात्रा में पीने से मूत्र न आने की शिकायत और पथरी के कष्ट से आराम मिलता है ।

वमन

इसके फूलों को जल में पीसकर स्तनों पर लेपकर दूध पिलाने से बालक की वमन रुक जाती है ।

बुद्धिवर्धक

Ashok की छाल तथा ब्राह्मी का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर एक – एक चम्मच सुबह – शाम एक कप दूध के साथ नियमित रूप से कुछ माह तक सेवन करने से बुद्धि तीव्र होती है ।

रक्तातिसार

Ashok के 3-4 ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्तातिसार में लाभ होता है ।

उबटन

Ashok की छाल के स्वरस में सरसों पीसकर छाया में सुखा लें । जब उबटन लगाना हो तो सरसों को इसकी छाल के स्वरस में ही पीसकर त्वचा पर लगाएं । इससे रंग निखरता है ।

मासिकधर्म

Ashok की छाल 80 ग्राम लेकर उससे चौगुने पानी में तब तक पकाएँ जब तक एक चौथाई पानी शेष न रह जाए ।

इसमें 80 ग्राम दूध डालकर तब तक उबालना चाहिए जब तक सब पानी जल न जाए । फिर इसे मथकर , छानकर स्त्री को प्रातः – सायं पिलाएँ । इस दूध को मासिकधर्म के चौथे दिन से तब तक पिलाएँ जब तक रक्तस्राव बंद न हो जाए ।

अस्थिभंग

Ashok की छाल का चूर्ण 6 ग्राम तक दूध के साथ सुबह – शाम सेवन करने तथा ऊपर से इसी का लेप करने से टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है और वेदना भी शान्त हो जाती है ।

रखूनी बवासीर

इसकी छाल का 40 से 50 मिली लीटर क्वाथ पिलाने से खूनी बवासीर का खून बन्द हो जाता है ।

Ashok की छाल और इसके फूलों को बराबर की मात्रा में लेकर इसमें से 30 ग्राम की मात्रा को रात में एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें । सुबह पानी छानकर पी लें । इसी प्रकार सुबह का भिगोया हुआ पानी शाम को पी लें । इससे खूनी बवासीर में शीघ्र ही आराम मिलता है ।

मुँहासे

Ashok की छाल का काढ़ा उबाल लें । गाढ़ा होने पर इसे ठंडा करके इसमें बराबर की मात्रा में सरसों का तेल मिला लें । इसे मुँहासों , फोड़ों , पुंसियों पर लगाएँ । नियमित प्रयोग से लाभ होगा ।

प्रदर

इसकी छाल के 40 से 50 मिली लीटर क्वाथ को दूध में मिलाकर प्रात : -सायं पिलाने से श्वेतप्रदर में लाभ होता है ।

इसकी छाल का चूर्ण और मिश्री समभाग खरल करके रखें । 3 ग्राम की मात्रा गौ दुग्ध से प्रातः – सायं देने से श्वेतप्रदर में लाभ होता है ।
Ashok की 3 ग्राम छाल को चावल के धोवन में पीस लें , फिर छानकर इसमें 1 ग्राम रसौत और 1 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से प्रातः – सायं इसका सेवन करें । सब प्रकार के प्रदर रोगों में इससे लाभ होगा । इस प्रयोग के साथ इसकी छाल के क्वाथ में फिटकरी मिलाकर योनि में इसकी पिचकारी भी लेनी चाहिए ।

स्त्रियों के प्रदररोग में 20 ग्राम Ashok की छाल , 20 ग्राम जौं , कूटकर 250 मिली लीटर जल में पकाएँ । 30 मिली लीटर शेष रहने पर इसमें 6 ग्राम शहद मिलाएँ । इसका क्वाथ सुबह – शाम सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है । अशोकघृत या अशोकारिष्ट भी इसमें लाभकारी है ।

श्वास

इसके बीजों के चूर्ण की 1 ग्राम की मात्रा को चावल भर के बराबर 6-7 बार पान के बीड़े में रखकर खिलाने से श्वास रोग में लाभ होता है ।

ढीलापन

Ashok की छाल , बबूल की छाल , गूलर की छाल , माजूफल और फिटकरी समान भाग में पीसकर 50 ग्राम चूर्ण को 500 मिली लीटर पानी में उबालकर 100 मिली लीटर काढ़ा तैयार कर लें । इसे छानकर पिचकारी के माध्यम से रोज़ को योनि में पहुँचाएँ , फिर 1 घंटे बाद पेशाब करें । कुछ ही दिनों के प्रयोग से योनि तंग हो जाएगी ।

जानवरों का साम्राज्य

अशोक के शिलालेख में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सभी जानवरों के जीव पीड़ित हैं, और वे रोकना नहीं चाहते हैं। हालाँकि, आप गाय का मांस खाना बंद नहीं करते हैं।

सभी चार-गाय के जानवरों का उनके जीवन के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है, लेकिन उनका उपयोग या खाया नहीं जा सकता है। संगे, संगे, कुछ विशेष प्रजातियों के पक्षियों और जानवरों द्वारा निषिद्ध है। ऐसे में सभी मादा बकरियां, युवा बकरियां, सूअर और भेड़ें, अपने बच्चे की देखभाल करने के लिए अपने जवानों को रोक रही हैं।

अशोक जानवर की मौत और ओखिनी के इलाज को रोक रहा था, वह अस्वस्थ रहा। अशोक की घड़ी का मौर्य साम्राज्य, दुनिया के गिनाल चुनल साम्राज्य में ऐवेना ऑपन जानवर का नागरिक शासक बना रहा।

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