Amaltas KE BEST 9+ UPYOG

Amaltas KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो apamarg ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास apamarg   होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है apamarg के उपयोग।

Amaltas KE BEST 9+ UPYOG
Amaltas KE BEST 9+ UPYOG

अन्य भाषाओं में Amaltas नाम

संस्कृत – आराग्वध , व्याधिघाती ,
पंजाबी – अमलतास , गिर्दमली चतुरंगुल , राजवृक्ष , कृतमाल
तेलगु – रल्लेकाया
हिन्दी – अमलतास , धनबहेड़ा
अरबी – ख्यारे शम्बर
गुजराती – गरमाल
अंग्रेज़ी – पुडिंग पाइप ट्री
लैटिन – कैसिया फिस्चूला
बंगाली – सोतालु , सोंदालएर वालनड़ी

परिचय

यह पूरे देश में सभी जगह पाया जाता है । मार्च – अप्रैल के महीने में इस वृक्ष की पत्तियाँ झड़ जाती हैं । उसके बाद नई पत्तियाँ और फूल प्रायः साथ ही निकलते हैं । उसके बाद इसमें कलियाँ लगती हैं जो डेढ़ से दो फुट लम्बी , गोल व नुकीली होती हैं तथा वर्षभर लटकी रहती हैं।

प्रयोग

इसका प्रयोग उदर शुद्धि , खाँसी , मुखपाक , टांसिल , उदरशूल आदि रोगों में किया जाता है ।

विभिन्न रोग व उपचार

कब्ज़
इसके फूलों का गुलकंद , आंत्र रोग , सूक्ष्म ज्वर एवं कोष्ठबद्धता में लाभदायक है ।

रक्तपित्त
इसके फल की मज्जा को अधिक मात्रा में लगभग 25 से 50 ग्राम तक 20 ग्राम मधु और शर्करा के साथ सुबह शाम देने से उर्ध्वगत रक्तपित्त में लाभ होता है ।

ज्वर
इसकी जड़ का प्रयोग ज्वर का निवारण करने के लिए और पौष्टिक औषधि के रूप में किया जाता है ।

सुरव प्रसव
Amaltas की 4-5 कली के 25 ग्राम छिलकों को औंटाकर उसमें शक्कर मिलाकर , छानकर गर्भवती स्त्री को सुबह – शाम पिलाने से बच्चा सुख से पैदा होता है ।

Amaltas की 15-20 पत्तियों से बना लेप कुष्ठ का नाश करता है ।
अमलतास के 10-15 पत्तों को पीसकर लेप करने से कुष्ठ , चकत्ते आदि चर्म रोगों में लाभ होता है ।

Amaltas की जड़ का लेप कुष्ठ रोग के कारण हुई फटी त्वचा को हटाकर व्रण स्थान को समतल कर देता है ।

टॉन्सिल
कफ के कारण टॉन्सिल बढ़ने पर जल पीने में भी जब कष्ट होता है तब इसकी जड़ की 10 ग्राम छाल को थोड़े जल में पकाकर उसको बूंद – बूंद कर मुख में डालते रहने से टॉन्सिल में आराम आता है ।

कण्ठमाला
इसकी जड़ को चावल के पानी के साथ पीसकर सूंघने और लेप करने से कण्ठमाला में आराम मिलता है ।

रखाँसी
Amaltas की गिरी 5 से 10 ग्राम को पानी में घोटकर उसमें तिगुना बूरा डाल गाढ़ी चाशनी बनाकर चटाने से सूखी खाँसी मिटती है ।

उदरशुद्धि
Amaltas के 2-3 पत्तों को नमक और मिर्च मिलाकर खाने से उदरशुद्धि होती है ।

नाक की फुसी
इसके पत्ते और छाल को पीसकर नाक की छोटी – छोटी कुंसियों पर लगाने से पुंसियाँ ठीक हो जाती हैं ।

व्रण
Amaltas, चमेली , करंज इनके पत्तों को गौमूत्र के साथ पीसकर लेप करें । इससे व्रण , दूषित अर्श और नाड़ी व्रण ( नासूर ) नष्ट होता है ।

विरेचक
इसके फल का गूदा सर्वश्रेष्ठ मृदु विरेचक है । यह ज्वर अवस्था , सुकुमार बालक एवं गर्भवती महिलाओं को दिया जाता है ।

दाद
Amaltas की 10 से 15 ग्राम मूल या मूल त्वक को दूध में औंटाकर पीसकर लेप करने से दाद में लाभ होता है । इसके पंचांग को जल में पीसकर दाद – खुजली और दूसरे चर्म विकारों पर लगाने से लाभ होता है ।

उदरशूल
उदरशूल और अफारे में इसकी मज्जा को पीसकर बच्चों की नाभि के चारों ओर लेप करने से लाभ होता है ।

शिशु की फुसी
इसके पत्तों को गौ के दूध के साथ पीसकर लेप करने से नवजात शिशु के शरीर पर होने वाली कुंसियाँ या छाले दूर हो जाते हैं ।

पित्त प्रकोप
इसके गूदे के 50 से 60 मिली लीटर से काढ़े में 5-10 ग्राम इमली का गूदा मिलाकर प्रातःकाल पिलाने से पित्त प्रकोप में लाभ होता है । यदि रोगी को कफ की अधिकता हो तो इसमें थोड़ा – सा निशोथ का चूर्ण भी मिलाना चाहिए ।

अर्दित
Amaltas के 10-15 पत्तों को गर्म करके उनकी पुल्टिस बाँधने से सुन्नवात , गठिया और अति में फायदा होता है।

वात वाहिनियों के आघात से उत्पन्न अर्दित आदि वात रोगों में इसके पतों का स्वरस पिलाने से लाभ होता है ।

इसके पत्तों के स्वरस की पक्षाघात से पीड़ित स्थान पर मालिश करने से भी लाभ होता है ।

हारिद्रमेह
Amaltas के 10 ग्राम पत्तों को 400 मिली लीटर पानी में पकाकर चौथाई अंश शेष रहने पर इसे छानकर इस क्वाथ का सेवन करना हारिद्रमेह में लाभकारी है ।

आमवात
आराग्वध ( अमलतास ) के 2-3 पत्तों को सरसों के तेल में भूनकर शाम के भोजन के साथ सेवन करने से आमवात में लाभ होता है ।

विसर्प
Amaltas के 8-10 पत्तों को पीसकर , घी मिलाकर लेप करने से विसर्प में लाभ होता है ।

वातरक्त
Amaltas मूल 5 से 10 ग्राम तक को 250 मिली लीटर दूध में जुटाकर सेवन करने से वातरक्त का नाश होता है ।

पित्त
लाल रंग की निशोथ के क्वाथ के साथ Amaltas की मज्जा का कल्क मिलाकर अथवा बेल के क्वाथ के साथ अमलतास की मज्जा का कल्क , नमक एवं शहद मिलाकर पित्त की प्रधानता में 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में पीना चाहिए ।

उदावत चार वर्ष से लेकर बारह वर्ष तक का बालक यदि दाह तथा उदावर्त्त रोग से पीड़ित हो तो उसे Amaltas की मज्जा को 2 से 4 नग मुनक्का के साथ देना चाहिए ।

कुष्ठ रोग उपचार में Amaltas के पेड़ का उपयोग
पत्तों या जड़ की छाल को पीसकर कुष्ठ रोग पर लगाएं। यह दाद या खुजली जैसे त्वचा रोगों में भी फायदेमंद है।
कुदज की पत्तियों की छाल और काढ़ा बना लें। इस स्नान, सेवन, लेप आदि को लेना कुष्ठ रोग में लाभदायक है।

त्वचा की समस्याओं के लिए अमलतास के पेड़ का उपयोग
छाछ, मकोय और कनेर की पत्तियों को छाछ के साथ पीस लें। इसके बाद सरसों के तेल से शरीर की मालिश करें, फिर पेस्ट को प्रभावित हिस्सों पर लगाएं। यह त्वचा रोगों में फायदेमंद है।
पत्तों को कांजी के साथ पीसकर त्वचा पर लगाने से चर्म रोग जैसे कुष्ठ, दाद, खुजली आदि में लाभ होता है।

दाद के उपचार के लिए अमलतास का पेड़ उपयोग करता है
पुदीने की पत्तियों और बलगम की छाल का पेस्ट बनाएं। इसे एरिसेपेलस लगाने से ठीक हो जाता है।
अमलतास के 8-10 पत्तों को पीसकर घी में मिला लें। इसे लगाना erysipelas में भी फायदेमंद है।

Apamarg KE BEST 9+ UPYOG

Apamarg KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

1 thought on “Amaltas KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE”

  1. Pingback: Aak KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE - allmovieinfo.net

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *