Ajavaayan KE BEST 9+ UPYOG

Ajavaayan KE BEST 9+ UPYOG JO AAPKO JANNA CHAIYE

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आप जानने वाले हो ajavaayan ke Best 9+ upyog  जो आपके बहुत काम सकती है।  इसलिए आप से  निवेदन है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

कई बार हमारे पास ajavaayan   होता तो है पर उसके उपयोग हमें पता नहीं होते  ऐसे में हमको कई बार इसका उपयोग करना पड़ता है।  इसलिए हम आपको बताने वाले है ajavaayan के उपयोग।

Ajavaayan KE BEST 9+ UPYOG

अन्य भाषाओं में ajavaayan के नाम

संस्कृत- यवानिका , उग्रगन्धा
गुजराती – जवाइन
हिन्दी – ajavaayan
मराठी – ओवा
बंगला – यमानी
लैटिन – टाइकोटिस अजवान
अंग्रेजी – विशप्स वीड सीड

परिचय

यह एक छोटा पौधा है । इसकी ऊँचाई लगभग 2 से 3 फुट होती है । इसके तने से कई शाखाएँ निकलती हैं । इसके पत्ते पंख के आकार के होते हैं जिनकी लम्बाई 2.5 सें.मी. तक होती है । इसके पत्ते बारीक , अण्डाकार , काँटेदार और छोटे आकार के होते हैं । इसकी डालियों पर सफेद फलों के गुच्छे होते हैं जो पक जाने पर ajavaayan के दानों में बदल जाते हैं । इन्हीं दानों का विशुद्ध रूप में मसाले व औषधि के निर्माण में प्रयोग होता है ।

प्रयोग

ajavaayan का सेवन पाचन संस्थान के रोगों के लिए अत्यन्त लाभकारी है । इससे उदरशूल शान्त होता है । यह जीवाणुनाशक एवं कृमिनाशक है । साथ ही अरुचि और अग्निमांद्य में भी लाभदायक है । अफीम सेवन से उत्पन्न होने वाले अहितकर लक्षणों को शान्त करने की यह उपयोगी औषधि है ।

इसके सेवन से अफीम सेवन की आदत छूट जाती है । ajavaayan के तेल की मालिश सर्दियों में लाभदायक होती है । अफारा ( पेट का फूलना ) में इसका लेप पेट पर करते हैं या पोटली बनाकर सेकते हैं । पुरानी खाँसी व श्वास ajavaayan का सेवन करने से लाभ होता है तथा कफ भी आसानी से निकल जाता है । सूतिका रोग में इसके प्रयोग से सभी उपद्रव शान्त होकर भूख बढ़ती है ।

विभिन्न रोग व उपचार

पेट के रोग

पतले दस्त , खूनी पेचिस , आंव , अपच , उदर पीड़ा , पेट में गैस , पेट में ऐंठन आदि में इसके प्रयोग से लाभ होता है ।

पेट दर्द में पान के पत्ते के साथ एक चम्मच ajavaayan के बीज में थोड़ा – सा काला नमक मिलाकर लें । इसके बीजों से तैयार उड़नशील तेल की 1 से 3 बूंद पानी में डालकर लेने से पतले दस्त , अपच तथा भोजन हज़म न होने की समस्याओं से छुटकारा मिलता है ।

यदि कॉलरा में उल्टी भी आए तो एक चम्मच ajavaayan , आधा चम्मच सोंठ व चौथाई चम्मच काले नमक को बारीक पीसकर इसकी 3 ग्राम की मात्रा गरम पानी के साथ सेवन करें ।

यदि पेट में गैस हो तो ajavaayan व सोंठ की समान मात्रा लेकर ढाई गुना नीबू के रस में भिगो दें । जब यह मिश्रण सूख जाए तो इसमें थोड़ा – सा काला नमक मिला लें । इसकी दो से ढाई ग्राम की मात्रा गरम पानी से लें ।

सर्दी से होने वाले रोग

सर्दी के कारण नाक बन्द होना , जुकाम , ठण्ड लगना आदि में यह लाभ करती है । कपड़े के एक टुकड़े में पाँच – दस ग्राम ajavaayan डालकर उसकी पोटली बनाकर थोड़ी – थोड़ी देर बाद दूंचे । जुकाम में आराम आता है ।

एक चम्मच ajavaayan को उबलते पानी में डालें और फिर इससे उठने वाली भाप लें । जुकाम में आराम आता है और बन्द नाक भी खुल जाती है ।

कान के रोग

कान में दर्द , कान का बहना , कान में फोड़े – फुसी आदि में इसके प्रयोग से लाभ होता है ।

पाँच चम्मच दूध में आधा चम्मच ajavaayan के बीज डालकर तब तक उबालें जब तक बीज दूध में अच्छी तरह न पक जाएँ । फिर दूध को छानकर इसकी 2-3 बूंदें कान में डालें । कान में दर्द एवं कान के बहने में आराम होगा ।

कान में फोड़े – फुसी के कारण दर्द और सूजन होने पर ajavaayan के बीज और अदरक 3-3 ग्राम को 40 मिली लीटर तिल के तेल में डालकर तब तक पकाएँ जब तक तेल का रंग लाल न हो जाए । इस तेल को छान लें और ठण्डा करने के बाद शीशी में भर लें । इस तेल की 2-3 बूंदें कान में डालें । कान की सूजन , कान के दर्द व कान में फँसी हो जाने पर इस तेल का प्रयोग करने से आराम आता है ।

सिरदर्द , आधासीसी का दर्द और बेहोशी

किसी पात्र में कोयले की आँच पर ajavaayan के कुछ दाने डाल दें और इस धुएँ को नाक से साँस द्वारा भीतर लें । इसके धुएँ से सिर दर्द , आधासीसी का दर्द व मूर्छा दूर होती है ।

त्वचा रोग

खाज , खुजली एवं फोड़े – फँसी में इसके प्रयोग से लाभ होता है ।

ajavaayan को गरम पानी में पीसकर दिन में 2-3 बार लेप करें । एक घण्टे के पश्चात गुनगुने पानी से धो लें।फोड़े पुंसी तथा खुजली में आराम आता है । नोट : जिनकी त्वचा नरम है , वे इसका उपयोग सावधानी से करें ।

सिर में जूं और लीरव होने पर

दो चम्मच ajavaayan तथा एक चम्मच फिटकरी को बारीक पीसकर एक कप छाछ में मिलाएं और लेप बना लें । रात को सोने से कुछ देर पूर्व इस लेप को बालों की जड़ों में अच्छी तरह से लगाएँ । सुबह सिर को ठण्डे पानी से धो लें । सिर में से जूंएँ व लीख समाप्त हो जाएँगी ।

मुरव रोग

गले में सूजन , दर्द , स्वरयंत्र प्रदाह , आवाज़ बैठना आदि रोगों में इसके प्रयोग से लाभ होता है । ajavaayan के बीजों का काढ़ा तैयार करें और इसी काढ़े से गरारे करें । उपरोक्त मुख रोगों से छुटकारा मिलेगा ।

वातजनित रोग

सूजन , दर्द व स्नायुविक पीड़ा में इसके प्रयोग से लाभ मिलता है । 100 मिली लीटर के तेल में 10-15 ग्राम ajavaayan डालकर उसे तब तक उबालें जब तक धुआँ न निकलने लगे ।

फिर इस तेल को ठण्डा कर शीशी में भर लें और प्रभावित अंग पर मालिश करें।इससे सूजन , दर्द एवं स्नायुविक पीड़ा दूर होती है ।

मूत्र रोग

बार – बार पेशाब आना , बिस्तर गीला करना आदि रोगों में इसके प्रयोग से लाभ होता है । ajavaayan और गुड़ की समान मात्रा को दिन में 6-6 घण्टे के अन्तराल से पानी से लें ।

बहुमूत्र रोग में लाभ रहता है । एक ग्राम ajavaayan का चूर्ण पानी के साथ लें । रात को सोने से पहले पानी न पीएँ ।

सोने से पहले पेशाब करके सोएँ । बिस्तर गीला करने ( विशेषकर छोटे बच्चों में ) की शिकायत दूर हो जाएगी ।

बाजीकरण

पौरुष शक्ति कम होना , शीघ्र वीर्यपात आदि में लाभकारी । ajavaayan और इमली की गुठली की मींगी को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें ।

इसके बाद इसे शुद्ध घी में भूनकर पाउडर बनाकर शीशी में भर लें । एक चम्मच पाउडर और 3 चम्मच शहद को गरम दूध में मिलाकर रात को सोने से पूर्व पीएँ । शीघ्रपतन एवं उत्तेजना की कमी दूर होगी ।

पेट के कीड़े

आधा चम्मच ajavaayan पाउडर में थोड़ा सा सेंधानमक मिलाकर दिन में तीन बार देने से बच्चों के पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

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